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  • Arya Samaj Marriage
  • Vedic Hawan
  • Grah Pravesh
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  • Shanti Hawan
  • Katha/Ved Pravachan
In Arya Samaj Mandir Lucknow the Hindu wedding ceremony, a rite known as 'sanskara', Arya Samaj Mandir Lucknow has many components and it is quite beautiful, specific and filled with chanting, Sanskrit blessings and ritual that is thousands of years old. In India, it can last weeks or days. In the West, it typically is at least two hours long. It is the role of the Hindu priest or 'pandit' to lead a couple and their families through the sacrament of marriage. Arya Samaj Mandir Lucknow however, as an interfaith minister, we had the good fortune of being called upon by Hindu brides and grooms and couples who love Hindu rituals, to incorporated some of the rites into non-denominational, interfaith or multi-faith ceremonies. An important aspect of the Hindu ceremony is to light a sacred fire, created from 'ghee' (clarified butter) and woolen wicks, to evoke the God, Agni (Fire God), to bear witness to the ceremony. The highlight is 'Saptapadi', also called the 'Seven Steps'..
Hawan Is the term for a sacred purifying ritual in Hinduism that involves a fire ceremony. It is a ritual of sacrifice made to the fire god Agni. After lighting a Havan Kund (sacrificial fire), objects such as fruits, honey, or wooden goods are put into the sacred fire. If there are any spirits that are evil around you or even inside you they get burned off in the sacred fire. It is believed that this sacrifice will bring health, happiness, luck and prosperity.
Griha (Greh) Pravesh ceremony is performed on the day when you start living into your new house. This is a very important occasion for any family. To start living, the entry into the new house on this auspicious day is termed as the Griha Pravesh ritual. It is believed that the new acquisition is susceptible to evil forces and jealousy and therefore various 'safeguard' ceremonies must be performed. This ceremony aims to appease the gods and planets so that the owner of the house is blessed with good fortune. In the day of the ceremony, house is cleaned and decorated with a garland of mango leaves, hung across the main doorway as a protective barrier against evil. Poles are erected outside the house around which banana leaves are wound and tied. Both the mango and the banana tree are considered auspicious, since they are symbols of fertility and prosperity..
जन्म कुंडली (Janam Kundali): जन्म कुंडली को कई लोग जन्म पत्रिका, वैदिक कुंडली, हिन्दू कुंडली आदि के नाम से भी जानते हैं। ऐसी कुंडली (Birth Chart) बनाते समय जातक के जन्म के समय नक्षत्रों और ग्रहों की सटिक स्थिति का आंकलन कर फलादेश बनाया जाता है।. जन्म समय के जन्म स्थान के रेखांश (Longitude) व अक्षांश (Latitude) के आधार पर ज्योतिषिय गणना कर सितारों और नक्षत्र के विषय में गणना करने के पश्चात एक ऐसी पत्रिका तैयार की जाती है जिसमें जातक के आने वाले भविष्य के बारें में बहुत ही भविष्यवाणी की जाती है। भारत में ज्यादातर परिवारों में कुंडली के आधार पर ही बच्चों का नामकरण होता है और शादी-विवाह आदि में भी इसको प्राथमिकता दी जाती है।
अपने जीवन को उजले कर्मों से और चमकाने का संकल्प! अपने सब पाप, छल, विफलता, रोग, झूठ, दुर्भाग्य आदि को इस दिव्य अग्नि में जला डालने का संकल्प! हर नए दिन में एक नयी उड़ान भरने का संकल्प, हर नयी रात में नए सपने देखने का संकल्प! उस ईश्वर रूपी अग्नि में खुद को आहुति बनाके उसका हो जाने का संकल्प, उस दिव्य लौ में अपनी लौ लगाने का संकल्प और इस संसार के दुखों से छूट कर अग्नि के समान ऊपर उठ मुक्त होने का संकल्प! हवन मेरी सफलता का आर्ग है. हवन मेरी मुक्ति का मार्ग है, ईश्वर से मिलाने का मार्ग है हवन / यज्ञ/ अग्निहोत्र मनुष्यों के साथ सदा से चला आया है। हिन्दू धर्म में सर्वोच्च स्थान पर विराजमान यह हवन आज प्रायः एक आम आदमी से दूर है। हिंदू धर्म में सर्वोपरि पूजनीय वेदों और ब्राह्मण ग्रंथों में यज्ञ/हवन की क्या महिमा है, उसकी कुछ झलक इन मन्त्रों में मिलती है|
विद्वानों अनुसार 'वेद' ही हैं हिंदुओं के धर्मग्रंथ। वेदों में दुनिया की हर बातें हैं। वेदों में धर्म, योग, विज्ञान, जीवन, समाज और ब्रह्मांड की उत्पत्ति, पालन और संहार का विस्तृत उल्लेख है। वेदों का सार है उपनिषद् और उपनिषदों का सार है सत्यार्थप्रकाश। वेद शाश्वत हैं। वेद परमात्मा की नित्य वाणी है। वेदों में सृष्टि रचना, वेद रचना आदि नित्य इतिहास ही हो सकता है, किन्तु किसी व्यक्ति विशेष का इतिहास नहीं हो सकता। इस सृष्टि के आदि में चारों वेद ऋषियों के हृदय में प्रकाशित हुए। वेद ज्ञान का भी दूसरा नाम है। वेदों के माध्यम से ईश्वर द्वारा समस्त मानव जाति को ज्ञान प्रदान किया गया जिससे वह अपनी उत्पत्ति के लक्षय को प्राप्त कर सके। यह ज्ञान ईश्वर द्वारा जिस प्रकार से वर्तमान सृष्टि में प्रदान किया गया उसी प्रकार से पूर्व की सृष्टियों में भी दिया जाता रहा और आगे आने वाली सृष्टियों में भी दिया जायेगा। जिस ज्ञान का उपदेश परमात्मा द्वारा सृष्टि के आरम्भ में मनुष्यों को दिया गया उसमें किसी भी प्रकार का इतिहास नहीं हो सकता। क्यूंकि इतिहास किसी रचना में उससे पूर्वकाल में उत्पन्न मनुष्यों का हुआ करता है। सृष्टि के आरम्भ में जब कोई मनुष्य ही नहीं था फिर उनका किसी भी प्रकार का इतिहास वेदों में पहले से ही वर्णित होना संभव ही नहीं है। मनुष्य का ऐतिहासिक क्रम वेदों की उत्पत्ति के पश्चात ही आरम्भ होता है।

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